हाथियों का आतंक: 12 घंटे दहशत में ग्रामीण और पत्रकार, वन अमला नदारद

 

कोरबा 14 फरवरी 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। जिले में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला कटघोरा वनमण्डल के जटगा रेंज अंतर्गत कटोरीनगोई के आश्रित मोहल्ला धोबीबारी का है, जहां करीब 40 हाथियों के विशाल दल ने दस्तक देकर दहशत फैला दी। बीती रात ग्रामीणों के साथ-साथ कवरेज करने पहुंचे पत्रकार भी लगभग 12 घंटे तक आतंक के साए में फंसे रहे। हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े दल की मौजूदगी के बावजूद मौके पर वन विभाग का कोई अमला नजर नहीं आया।

10 घर तोड़े, मवेशियों की मौत, बेघर हुए परिवार

दो दिन पहले हाथियों के झुंड ने धोबीबारी में करीब 10 घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और कुछ पालतू जानवरों को भी मार डाला। निर्धन परिवारों का आशियाना उजड़ गया है और वे खुले आसमान के नीचे पेड़ों की शरण में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारी मौके पर आए जरूर, लेकिन किसी प्रकार की ठोस सहायता या सुरक्षा व्यवस्था नहीं की।

कवरेज करने पहुंचे पत्रकार भी फंसे

शुक्रवार को घटना की ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए पहुंचे पत्रकार शारदा पाल, नानक सिंह राजपूत, लक्ष्मण महंत और हरीश साहू दोपहर करीब 1 बजे 5 किलोमीटर पथरीला पहाड़ी रास्ता तय कर गांव पहुंचे। शाम करीब 7 बजे हाथियों का दल मुख्य पगडंडी मार्ग पर आ गया, जो गांव से बाहर निकलने का एकमात्र रास्ता है।

अंधेरा घिरते ही स्थिति भयावह हो गई। भोजन के दौरान ही हाथियों की हलचल शुरू हो गई और सभी को जान बचाने की चिंता सताने लगी। मोबाइल फोन की बैटरियां कमजोर पड़ने लगीं। अलाव और ग्रामीणों की टॉर्च के सहारे रात गुजारी गई। हाथियों के करीब आने पर कभी इधर तो कभी उधर भागकर जान बचानी पड़ी। आधी रात के बाद हाथियों के लौटने पर सभी ने राहत की सांस ली। सौभाग्य से कोई अप्रिय घटना नहीं हुई।

वन विभाग की लापरवाही पर सवाल

इतने बड़े झुंड की सक्रियता के बावजूद मौके पर न तो ‘एलिफेंट स्क्वॉड’ तैनात था और न ही किसी प्रकार की निगरानी व्यवस्था दिखाई दी। न रास्ता बंद किया गया, न डायवर्जन की व्यवस्था। विशेष संरक्षित जनजाति पण्डो-कोरवा परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि हाथी-मानव द्वंद्व रोकने और प्रभावित क्षेत्रों में टॉर्च व अन्य संसाधन बांटने के नाम पर योजनाएं तो चलाई जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी प्रभावशीलता नजर नहीं आती। यदि बीती रात कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

प्रशासन से मांग

ग्रामीणों ने तत्काल राहत, क्षतिपूर्ति, अस्थायी आवास और हाथियों की निगरानी के लिए स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की मांग की है। साथ ही हाथी-मानव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी और त्वरित कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया है।

कोरबा जिले में लगातार बढ़ रहे हाथी-मानव द्वंद्व के बीच यह घटना एक बार फिर प्रशासनिक तैयारियों और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही है।

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