कोरबा 28 फरवरी 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। जिले के वनांचल क्षेत्र तौलीपाली में प्रस्तावित कोल ब्लॉक नीलामी और ड्रोन सर्वे के विरोध में 27 फरवरी, गुरुवार को हजारों ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। चचिया चौक आंदोलन का केंद्र बना रहा, जहां सुबह से लेकर देर शाम तक उरगा–हाटी मुख्य मार्ग पर ग्रामीणों ने चक्का जाम कर दिया। करीब 5 से 6 घंटे तक यातायात पूरी तरह बाधित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में घोषणा की कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना वे एक इंच जमीन भी नहीं देंगे। ग्रामीणों का कहना है कि कोल ब्लॉक नीलामी की आड़ में उनकी जमीन, जंगल और जल स्रोतों को खतरे में डाला जा रहा है। यह केवल खनन का मामला नहीं, बल्कि उनके अस्तित्व, परंपरा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा प्रश्न है।
आंदोलन में चचिया, तौलीपाली, लुदुखेत, धौराभाठा, कुदमुरा, कलगामार, कटकोना, कोलगा, तौबी पानी, बगामार, शिभाला बोटमार (गेरॉव) और कुदमुरा सहित आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। धरना स्थल पर जमकर नारेबाजी की गई और प्रशासन से कोल ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने तथा क्षेत्र में किसी भी प्रकार के खनन व संभावित विस्थापन पर पूर्ण रोक लगाने की मांग की गई।
कलेक्टर के नाम सौंपा ज्ञापन
आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने कलेक्टर को संबोधित एक ज्ञापन भी प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि प्रस्तावित कोल ब्लॉक क्षेत्र पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र में आता है और यहां बड़ी संख्या में आदिवासी एवं वन आश्रित समुदाय निवास करते हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वनाधिकार अधिनियम (FRA) के तहत ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होने के बावजूद बिना प्रस्ताव और सहमति के नीलामी व सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि यदि ग्राम सभा की सहमति के बिना खनन या सर्वे का प्रयास किया गया तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों ने यह भी मांग की कि कोल ब्लॉक नीलामी की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए और क्षेत्र में किसी भी प्रकार के भूमि अधिग्रहण या विस्थापन पर रोक लगाई जाए।
प्रशासन ने दिया लिखित आश्वासन
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अपर कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार एवं जनपद कोरबा के सीईओ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच लंबी चर्चा और तीखी बहस के बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया कि ग्राम सभा के प्रस्ताव के बिना किसी भी प्रकार का खनन या विस्थापन कार्य नहीं किया जाएगा। इस लिखित भरोसे के बाद ही देर शाम ग्रामीणों ने चक्का जाम समाप्त करने की घोषणा की।
धरना स्थल से ग्रामीण नेता अभिमन्यु राठिया, चचिया सरपंच श्याम बरण गोपी राठिया, तौलीपाली सरपंच प्रतिनिधि महेत्तर राठिया, पूर्व उपसरपंच गंगा राम निषाद तथा सरपंच महेंद्र राठिया ने कहा कि यह संघर्ष किसी एक गांव का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की अस्मिता की लड़ाई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन अपने आश्वासन से पीछे हटता है तो आंदोलन और व्यापक व उग्र रूप लेगा।
यह प्रदर्शन जिले में खनन परियोजनाओं को लेकर गहराते असंतोष का बड़ा संकेत माना जा रहा है। जंगल और जमीन की रक्षा को लेकर ग्रामीण अब निर्णायक संघर्ष के मूड में नजर आ रहे हैं।

