👉 क्लीनिकल स्थापना में सेवायें देने वाले चिकित्सकों को नर्सिंग होम एक्ट में पंजीयन कराना अनिवार्य
कोरबा 12 मार्च 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। जिले में संचालित विभिन्न हॉस्पिटल, नर्सिंग होम, मेटरनिटी होम, क्लीनिक, पैथोलॉजी लैब एवं डायग्नोस्टिक सेंटर में राज्य के अलग-अलग जिलों से आने वाले चिकित्सक तथा शासकीय डॉक्टर ओपीडी सेवाएं दे रहे हैं। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी क्लीनिकल स्थापना में सेवाएं देने से पहले चिकित्सकों का नर्सिंग होम एक्ट के अंतर्गत पंजीयन कराना अनिवार्य है।
सीएमएचओ ने बताया कि सभी चिकित्सकों को आयुर्विज्ञान परिषद में पंजीयन (रजिस्ट्रेशन प्रमाण) तथा सेवा देने के समय संबंधी शपथपत्र मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में जमा करना आवश्यक है। साथ ही क्लीनिकल संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि उनकी संस्थाओं में सेवाएं देने वाले सभी शासकीय एवं निजी चिकित्सकों का नर्सिंग होम एक्ट के तहत आवश्यक दस्तावेजों के साथ पंजीयन कराया जाए।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने क्लीनिकल स्थापना संचालकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी संस्थान में बिना पंजीकृत चिकित्सकों से सेवाएं ली जाती हैं तो छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम 2010 (22 सितंबर 2010) के अध्याय तीन के नियम 12 (क) (1) के अनुसार 20 हजार रुपये तक का अर्थदंड लगाया जा सकता है। वहीं दूसरी बार इस प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर तीन वर्ष तक का कारावास अथवा 50 हजार रुपये तक का अर्थदंड या दोनों की सजा का प्रावधान है।
इधर हाल ही में आयोजित शिवाय हॉस्पिटल के उद्घाटन कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने अपने संबोधन में कहा कि 100 बिस्तरों वाला शिवाय हॉस्पिटल अब जनसेवा के लिए प्रारंभ हो चुका है और यहां इलाज की सुविधा भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि अस्पताल के शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी और उन्हें स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होगा।
हालांकि इस बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो रहा है। जानकारी के अनुसार शिवाय हॉस्पिटल द्वारा अभी तक आवश्यक लाइसेंस और औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गई हैं, बावजूद इसके अस्पताल में ओपीडी सेवाएं शुरू कर दी गई हैं। ऐसे में जब स्वास्थ्य विभाग स्वयं क्लीनिकल संस्थानों के लिए पंजीयन और नियमों के पालन को अनिवार्य बता रहा है, तो यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या शिवाय हॉस्पिटल ने सभी नियमों का पालन किया है।
यदि ऐसा नहीं है तो क्या स्वास्थ्य विभाग इस मामले में कार्रवाई करने से बच रहा है? जिले में यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या उद्योग मंत्री के संरक्षण के कारण विभाग जुर्माना या अन्य कार्रवाई करने से परहेज कर रहा है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाता है और नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

