कोरबा 10 मार्च 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। शहर के टीपी नगर में 7 मार्च को विवादों के बीच श्रम मंत्री व अन्य जनप्रतिनिधियों के हाथों उद्घाटित शिवाय हॉस्पिटल को लेकर अब बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक लाइसेंस प्राप्त किए बिना ही अस्पताल का संचालन शुरू कर दिया है और मरीजों की जांच-इलाज भी किए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग में लाइसेंस हेतु आवेदन 2 मार्च 2026 को किया गया था। हालांकि विभागीय प्रक्रिया अभी प्रारंभिक स्तर पर ही है, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल में ओपीडी शुरू कर मरीजों को देखना, जांच लिखना और उपचार करना शुरू कर दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार अस्पताल का उद्घाटन करना अलग प्रक्रिया है, जिसके लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन किसी भी अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी या जांच सेवाएं शुरू करने के लिए स्वास्थ्य विभाग से लाइसेंस और संचालन अनुमति अनिवार्य होती है। बिना लाइसेंस न तो मरीजों का पंजीयन किया जा सकता है और न ही जांच या उपचार किया जा सकता है।
बताया जा रहा है कि 5 मार्च को पूजा-अर्चना के बाद अस्पताल में ओपीडी शुरू कर दी गई थी और इसके दो दिन बाद 7 मार्च को श्रम मंत्री के हाथों औपचारिक उद्घाटन कराया गया। इस बीच 3 मार्च को होलिका दहन और 4 मार्च को होली का त्योहार होने के कारण विभागीय दफ्तरों में सामान्य कामकाज नहीं हो पाया, जिससे आवेदन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
निरीक्षण के बाद ही मिल सकता है लाइसेंस
स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित निरीक्षण दल अस्पताल की सुविधाओं, उपकरणों और अन्य मानकों की जांच करेगा। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर लाइसेंस के लिए आगे भेजी जाएगी। सामान्य प्रक्रिया में यह अनुमति मिलने में करीब एक माह का समय लग सकता है। लाइसेंस मिलने के बाद ही अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी और अन्य जांच सेवाएं विधिवत शुरू की जा सकती हैं।
मरीजों से शुल्क वसूलने का भी आरोप
स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में ओपीडी के लिए मरीजों से 400 रुपये शुल्क लिया जा रहा है। इसके अलावा कई मरीजों को ईसीजी जांच के लिए भी लिखा जा रहा है, जिसके लिए अस्पताल में 500 रुपये तक लिए जा रहे हैं। जबकि मरीजों का कहना है कि बाहर यही जांच लगभग 300 रुपये में हो जाती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना लाइसेंस अस्पताल संचालन और मरीजों से शुल्क वसूली जैसे मामलों पर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करते हैं। देखना होगा कि नियमों के उल्लंघन पर प्रशासन सख्ती दिखाता है या फिर प्रभाव और रसूख के दम पर यह संचालन यूं ही जारी रहता है।

