आयुर्वेद से मिली नई जिंदगी: ऑपरेशन की सलाह के बाद 6 महीने में स्वस्थ हुआ युवक

 

कोरबा 30 अप्रैल 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। नसों से जुड़ी गंभीर बीमारी “स्नायुगत वात” से पीड़ित एक युवक ने आयुर्वेदिक उपचार के जरिए नई जिंदगी पाई है। जहां आधुनिक चिकित्सा पद्धति में डॉक्टरों ने ऑपरेशन को ही एकमात्र विकल्प बताया था, वहीं आयुर्वेदिक इलाज, नियम और परहेज के पालन से युवक महज छह महीने में पूरी तरह स्वस्थ हो गया।

बिल्हा निवासी व्यवसायी कन्हैया माखीजा लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रहे थे। उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें झुककर काम करने में कठिनाई होती थी और असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता था। यहां तक कि उनका दाहिना हाथ भी ऊपर नहीं उठ पाता था। कई डॉक्टरों से परामर्श और जांच के बाद एमआरआई रिपोर्ट में L4-L5 में समस्या सामने आई, जिसके चलते उन्हें सर्जरी की सलाह दी गई।

ऑपरेशन के डर से चिंतित कन्हैया माखीजा ने अंततः एक मित्र की सलाह पर आयुर्वेदिक चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा से संपर्क किया। डॉ. शर्मा ने नाड़ी परीक्षण और रिपोर्ट के आधार पर आयुर्वेदिक दवाइयां, दिनचर्या और खानपान से जुड़े विशेष परहेज बताए।

कन्हैया माखीजा ने पूरी निष्ठा से इन निर्देशों का पालन किया। परिणामस्वरूप, मात्र छह महीनों में उनकी स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ और वे पूरी तरह स्वस्थ हो गए। अब वे बिना किसी दर्द के अपने सभी कार्य, यहां तक कि झुककर काम भी आसानी से कर पा रहे हैं। उनका हाथ भी सामान्य रूप से उठने लगा है और सभी मेडिकल रिपोर्ट्स भी सामान्य आ गई हैं।

कन्हैया माखीजा इस अनुभव को “चमत्कार” मानते हैं। उनका कहना है कि जहां उन्हें ऑपरेशन की स्थिति तक पहुंचा दिया गया था, वहीं आयुर्वेद ने उन्हें बिना सर्जरी के पूर्ण स्वस्थ कर दिया। अब वे अन्य लोगों को भी आयुर्वेद अपनाने की सलाह दे रहे हैं।

वहीं, नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा का कहना है कि यह किसी व्यक्ति का नहीं, बल्कि आयुर्वेद की शक्ति का परिणाम है। उनके अनुसार आयुर्वेद एक प्राचीन, शाश्वत और सुरक्षित चिकित्सा पद्धति है, जो ऋषि-मुनियों की देन है और आज भी गंभीर बीमारियों के उपचार में सक्षम है।

यह मामला आयुर्वेद की प्रभावशीलता को दर्शाता है और उन मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है, जो जटिल बीमारियों और सर्जरी के विकल्प से डरते हैं।

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