KORBA: PM आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा? 44 हितग्राहियों की राशि दूसरे खातों में भेजे जाने का आरोप, कई पंचायतें सवालों के घेरे में

 


कोरबा 30 जुलाई 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराने की मंशा पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। कोरबा विकासखंड की कई ग्राम पंचायतों से सामने आई शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि पात्र हितग्राहियों के नाम पर स्वीकृत आवास की राशि कथित रूप से दूसरे लोगों के बैंक खातों में भेज दी गई। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो यह सरकारी योजना में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का मामला हो सकता है।

प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित गड़बड़ियों को लेकर कई ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। प्रभावित लोगों का आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किया गया, जिससे वास्तविक हितग्राहियों को मिलने वाली सरकारी सहायता दूसरे लोगों के खातों में पहुंच गई।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में शासन के निर्देश पर ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थायी प्रतीक्षा सूची का सत्यापन किया गया था। इस दौरान पात्र और अपात्र हितग्राहियों की अलग-अलग सूची तैयार की गई तथा अपात्र पाए गए लोगों के नाम सूची से हटा दिए गए थे। आरोप है कि 14 अप्रैल 2026 को आयोजित ग्राम सभा में बिना किसी नए शासनादेश के उन्हीं लोगों को दोबारा पात्र दर्शाने के लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया संबंधित हितग्राहियों की जानकारी और सहमति के बिना पूरी की गई।

शिकायतों के मुताबिक, जिन लोगों के नाम पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए, उनके स्थान पर अन्य व्यक्तियों के आधार नंबर और बैंक खाते दर्ज कर दिए गए। इसके चलते सरकारी सहायता राशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय दूसरे खातों में स्थानांतरित हो गई।

ग्रामीणों का दावा है कि चिर्रा, देवरमाल, खोड्डल, कुदमुरा, नकिया, नकटीखार और तिलकेजा ग्राम पंचायतों के कुल 44 हितग्राहियों की राशि कथित रूप से दूसरे बैंक खातों में भेजी गई। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही का नहीं बल्कि सरकारी योजना में गंभीर वित्तीय अनियमितता का हो सकता है।

आरोप यह भी हैं कि पंचायत स्तर से सूची भेजे जाने के बाद जनपद स्तर पर पंजीयन प्रक्रिया में भी गंभीर गड़बड़ियां हुईं। आवास योजना से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही शिकायतों ने पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

गौरतलब है कि तिलकेजा ग्राम पंचायत में इससे पहले भी प्रधानमंत्री आवास योजना में अनियमितताओं के आरोप सामने आ चुके हैं। अब एक बार फिर कई पंचायतों से समान प्रकृति की शिकायतें मिलने के बाद पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 44 हितग्राहियों की राशि दूसरे खातों में कैसे पहुंची, इसके लिए जिम्मेदार कौन है और शिकायतों के बावजूद अब तक किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई। इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ पाएंगे। जब तक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रधानमंत्री आवास योजना की पारदर्शिता और गरीब हितग्राहियों का भरोसा दोनों सवालों के घेरे में रहेंगे।

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