कोरबा 10 अगस्त 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। कोरबा के टीपी नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में 62 वर्षीय महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और उपचार में लगे चिकित्सकों एवं स्टाफ पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। मृतका के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उनकी हालत लगातार बिगड़ती गई और समय रहते उचित उपचार एवं विशेषज्ञ चिकित्सकीय सलाह नहीं मिलने के कारण उनकी मौत हो गई। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने महिला के गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने की बात कही है।
मामला लालूराम कॉलोनी निवासी सविता जायसवाल (62) का है। परिजनों के अनुसार 4 अगस्त की रात सविता जायसवाल को कमर में अचानक दर्द होने के बाद नजदीक होने के कारण शिवाय हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि जांच के बाद चिकित्सकों ने रीढ़ की हड्डी में गैप होने की बात बताई और उन्हें एनआईवी सपोर्ट पर रखा गया।
एनआईवी सपोर्ट बार-बार हटाने के बावजूद निगरानी नहीं होने का आरोप
मृतका की बेटी सोनाली के अनुसार उनकी मां एनआईवी सपोर्ट बार-बार हटा देती थीं। परिजनों का आरोप है कि रात में मरीज की पर्याप्त निगरानी नहीं की गई और चिकित्सक एवं स्टाफ लगातार मरीज के पास मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि इसी दौरान मां की हालत बिगड़ती चली गई।
सोनाली का आरोप है कि बाद में स्थिति गंभीर होने पर उनकी मां को वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। परिजनों ने सवाल उठाया है कि जब मरीज एनआईवी सपोर्ट बार-बार हटा रही थीं, तो समय रहते दूसरे विकल्प क्यों नहीं अपनाए गए।
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भर्ती के समय ही क्रिटिकल कंडीशन का फार्म भरवाने का आरोप
सोनाली ने आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती कराने के दौरान उनसे पहले खाली फार्म पर हस्ताक्षर कराने का प्रयास किया गया। बाद में फार्म में मरीज की हालत गंभीर होने की जानकारी लिखे जाने के बाद हस्ताक्षर कराए गए।
परिजनों का आरोप है कि मरीज की पूरी स्थिति समझाने और पर्याप्त जानकारी देने के बजाय अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए।
चिकित्सकों से मिलने नहीं देने का भी लगाया आरोप
मृतका के पुत्र शिवम ने अस्पताल में बाउंसर तैनात किए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि जब वे अपनी मां की स्थिति जानने के लिए उपचार कर रहे चिकित्सकों से मिलना चाहते थे, तो उन्हें चिकित्सकों से सीधे बातचीत नहीं करने दी गई।
शिवम का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद बाउंसर मरीज के परिजनों को चिकित्सकों से मिलने से रोकते थे और उनसे ही बातचीत करने के लिए कहते थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अस्पताल में इलाज को लेकर पारदर्शिता है तो मरीज के परिजनों को डॉक्टरों से मिलने से क्यों रोका गया।
परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल
मृतका के जेठ एवं पूर्व अनुविभागीय अधिकारी जल संसाधन प्रदीप जायसवाल ने आरोप लगाया कि अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है और इलाज के नाम पर मरीजों से भारी राशि वसूली जा रही है। उन्होंने सविता जायसवाल की मौत को उपचार में कथित लापरवाही का परिणाम बताते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।
अस्पताल के लाइसेंस और संचालन को लेकर भी उठे सवाल
नर्सिंग होम एक्ट के तहत 100 बिस्तरों वाले शिवाय हास्पिटल ने बिना लायसेंस मंत्री के हाथों 08 मार्च को उद्घाटन करा दिया था, जो अवैध माना जा रहा था, लेकिन मंत्री के हाथों फीता कटवाने के बाद आखिर प्रबंधन को किसका डर! यह जरूर प्रचारित किया जा रहा था कि 10 बिस्तरों के आधार पर कैजुअल लाइसेंस लिया गया है लेकिन 100 बिस्तरों के अस्पताल में 10 बिस्तरों के नाम से लाइसेंस लेकर उद्घाटन,बिना वैध लायसेंस प्राप्त किये है उद्घाटन से पहले ओपीडी का संचालन, मरीजों की जांच आखिर किस आधार पर शुरू किया गया?
'मरीज की जान बचाना हमारा काम' : डॉ. दिविक मित्तल
मामले में अस्पताल प्रबंधन का पक्ष जानने के लिए शिवाय हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. दिविक मित्तल से संपर्क किया गया। उन्होंने कहा कि सविता जायसवाल का उपचार उन्होंने स्वयं नहीं किया था। उनके अनुसार उपलब्ध जानकारी के मुताबिक मरीज गंभीर स्थिति में अस्पताल पहुंची थीं और उनके फेफड़ों तथा किडनी में संक्रमण था।
डॉ. मित्तल ने कहा कि अस्पताल का काम मरीज की जान बचाना है। उन्होंने बताया कि मरीज की पूरी मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद ही उपचार और मौत के संबंध में विस्तृत जानकारी दी जा सकती है। उन्होंने फोन पर मामले की पूरी जानकारी देने के बजाय अस्पताल में आकर रिपोर्ट देखने की बात कही।
दशगात्र के बाद जांच और कार्रवाई की बात
मृतका की बेटी सोनाली का कहना है कि फिलहाल पूरा परिवार शोक में है। उनका आरोप है कि उनकी मां को समय पर रेफर नहीं किया गया और बाहर से किसी विशेषज्ञ चिकित्सक को भी नहीं बुलाया गया।सोनाली ने कहा कि परिवार पहले दशगात्र की रस्म पूरी करेगा, इसके बाद मां की मौत के कारणों और कथित लापरवाही को लेकर उचित स्तर पर शिकायत और कार्रवाई की मांग की जाएगी।



