KORBA: निगम-व्यापारी विवाद में चेम्बर की पहल, कहा- कानून भी रहे, संवाद भी कायम रहे

 


कोरबा 8 अगस्त 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। शहर में स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के बीच निगम और व्यापारियों के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए जिला चेम्बर ने पहल की है। पौधारोपण अभियान के दौरान पौधा काटने और कचरा फेंकने जैसे मामलों में जुर्माना नहीं पटाने तथा कथित रूप से राजनीतिक पहचान का हवाला देकर निगम अधिकारियों पर दबाव बनाने के आरोपों के बाद शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की एफआईआर दर्ज होने से विवाद की स्थिति बनी थी। इसे देखते हुए जिला चेम्बर के महामंत्री नरेंद्र अग्रवाल ने नगर निगम आयुक्त को पत्र भेजकर व्यापारियों के खिलाफ छोटी-छोटी घटनाओं में सीधे एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।

चेम्बर ने पत्र में कहा है कि पिछले कुछ समय से व्यापारियों के खिलाफ अपेक्षाकृत छोटे मामलों में भी सीधे एफआईआर दर्ज होने से व्यापारिक वर्ग में चिंता और तनाव का माहौल बन रहा है। चेम्बर ने आग्रह किया है कि भविष्य में किसी व्यापारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने से पहले संबंधित व्यक्ति को नोटिस जारी कर उसका पक्ष सुनने और यदि कोई त्रुटि हुई है तो उसे सुधारने का उचित अवसर दिया जाए। चेम्बर का मानना है कि इससे अनावश्यक विवादों से बचने के साथ ही निगम और व्यापारियों के बीच आपसी विश्वास एवं सहयोग की भावना मजबूत होगी।

जिला चेम्बर ने कहा कि व्यापारी वर्ग शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखने के लिए नगर निगम के स्वच्छता, पौधारोपण और जनजागरूकता अभियानों में लगातार सहयोग करता आया है और आगे भी करता रहेगा। कोरबा में व्यापारियों और नगर निगम के बीच लंबे समय से सौहार्दपूर्ण एवं सहयोगात्मक संबंध रहे हैं। ऐसे में किसी भी विवाद का समाधान टकराव के बजाय बातचीत के माध्यम से किया जाना बेहतर होगा।

चेम्बर ने यह भी स्पष्ट किया है कि शहर की व्यवस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए नियमों का पालन कराया जाना जरूरी है, लेकिन कार्रवाई की प्रक्रिया में संवाद और सुधार का अवसर भी महत्वपूर्ण है। व्यापारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे निगम के नियमों का पालन करें और शहरहित के अभियानों में सहयोग दें। वहीं, किसी अधिकारी या कर्मचारी पर राजनीतिक पहचान अथवा दबाव का इस्तेमाल कर विवाद को बढ़ाना भी उचित नहीं है।

चेम्बर का कहना है कि यदि मामला छोटी गलती से जुड़ा है तो पहले समझाइश, नोटिस और सुधार का अवसर दिया जा सकता है, जबकि गंभीर या जानबूझकर किए गए उल्लंघन के मामलों में नियमानुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। जिला चेम्बर की यह पहल कार्रवाई रोकने के बजाय निगम और व्यापारियों के बीच संवाद के माध्यम से विवादों को सुलझाने तथा कार्रवाई की प्रक्रिया को संतुलित बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। चेम्बर ने उम्मीद जताई है कि निगम आयुक्त उसके अनुरोध पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।

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