छह साल की मासूम से दुष्कर्म और हत्या मामले में आरोपी को फांसी की सजा, कोर्ट ने माना ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’

 

दुर्ग 11 सितंबर 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में छह साल की बच्ची से दुष्कर्म के बाद हत्या के सनसनीखेज मामले में विशेष पॉक्सो फास्ट ट्रैक अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 24 वर्षीय आरोपी को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी दुर्लभतम मामलों में दुर्लभ माना है।

अदालत ने पीड़ित परिवार को राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने का भी निर्देश दिया है। हालांकि, मृत्युदंड की पुष्टि के लिए मामला नियमानुसार छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के समक्ष जाएगा।

लापता होने के बाद वाहन में मिला था बच्ची का शव

पुलिस के अनुसार, पिछले साल 6 अप्रैल को छह साल तीन महीने की बच्ची के लापता होने की सूचना मिली थी। मामले में मोहन नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कर पुलिस ने तलाश शुरू की। कुछ समय बाद बच्ची एक वाहन में मृत अवस्था में मिली। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के साथ यौन अपराध की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित कर जांच शुरू की।

चाचा पर लगा था दुष्कर्म और हत्या का आरोप

जांच में सामने आया कि बच्ची पड़ोस में अपनी दादी के घर आयोजित एक कार्यक्रम में गई थी। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान उसके 24 वर्षीय चाचा ने उसके साथ यौन अपराध किया और उसकी हत्या कर दी। आरोप है कि वारदात के बाद बच्ची के शव को पड़ोसी की कार में रख दिया गया।

पुलिस ने जांच के दौरान घटनास्थल और आसपास से महत्वपूर्ण भौतिक एवं जैविक साक्ष्य जुटाए। आरोपी के कपड़े, बाल और अन्य नमूनों के साथ डीएनए सैंपल को वैज्ञानिक जांच के लिए भेजा गया। इसके अलावा सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर को भी जांच का हिस्सा बनाया गया।

डीएनए और फॉरेंसिक साक्ष्यों ने आरोपी तक पहुंचाई पुलिस

अभियोजन पक्ष ने अदालत में डीएनए, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों समेत अन्य महत्वपूर्ण प्रमाण प्रस्तुत किए। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया।

विशेष पॉक्सो अदालत ने पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत आरोपी को सजा सुनाई। अदालत ने बच्ची की कम उम्र, अपराध की गंभीरता और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों को देखते हुए इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में माना और मृत्युदंड दिया।

पीड़ित परिवार को 7 लाख रुपये की सहायता

अदालत ने पीड़ित परिवार को राज्य शासन की आहत प्रतिकर योजना के तहत 7 लाख रुपये की सहायता राशि देने का निर्देश भी दिया है। फैसले को नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में कड़ा न्यायिक संदेश माना जा रहा है।

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