KORBA: DMF फंड पर बड़ा सवाल: “खनन पीड़ितों का पैसा, दूसरों की मौज!” – जांच टीम के सामने फूटा गुस्सा

 


कोरबा 15 जनवरी 2026 (नवचेतना न्यूज छत्तीसगढ़)। जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) के तहत हुए हजारों करोड़ के खर्च को लेकर उठे सवालों पर राज्य शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय जांच दल ने शुक्रवार को जिला कार्यालय कोरबा में आपत्तियां सुनीं। जनहित याचिका दायर करने वाले लक्ष्मी चौहान, सपुरन कुलदीप और अजय श्रीवास्तव समेत जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि खनन प्रभावितों के हक का पैसा गैर-प्रभावित क्षेत्रों में उड़ाया जा रहा है।

जांच समिति में हरिशंकर चौहान, उपायुक्त स्मृति तिवारी और लेखाधिकारी स्मिता पाण्डेय मौजूद रहीं। सुनवाई के दौरान तीखे सवाल उठे—“10 साल में 4000 करोड़ खर्च हुए, लेकिन खनन पीड़ितों को मिला क्या?”

ग्रामीणों ने कहा कि DMF राशि से बने बड़े भवन, पर्यटन केंद्र और अन्य ढांचों से होने वाली आय प्रभावितों तक नहीं पहुंच रही। सतरेंगा जैसे पर्यटन क्षेत्र में DMF फंड से काम कराया गया, लेकिन वहां की कमाई पर्यटन मंडल के पास जाती है। फिर भूविस्थापितों को इसका लाभ कैसे?

यह भी आरोप लगा कि कई कार्य पहले ही SECL के CSR मद से हो चुके हैं, फिर उन्हीं कामों को DMF से दोबारा दिखाकर राशि खर्च की गई। विभागों के नियमित कार्य भी DMF से कराए जा रहे हैं, जबकि धरातल पर नतीजे नजर नहीं आते।

500 गांवों में हुए कार्यों का पूरा हिसाब दो

आवेदक लक्ष्मी चौहान ने जांच समिति से मांग की कि राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में जिन 500 गांवों में DMF से कार्य कराने का दावा किया है, उससे जुड़े सभी दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं, ताकि उनका प्रतिपरीक्षण किया जा सके। दस्तावेज मिलने के बाद पक्ष रखने के लिए 5 दिन का समय भी मांगा गया।

प्रमुख मांगें जो गूंज उठीं

सपुरन कुलदीप ने जोर देते हुए कहा—

1. DMF से होने वाली सभी नियुक्तियों में प्रत्यक्ष प्रभावितों को प्राथमिकता मिले।

2. अब तक हुई संविदा भर्तियों को निरस्त कर पारदर्शी प्रक्रिया से नई भर्ती हो।

3. जब तक प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सोशल ऑडिट और परफॉर्मेंस ऑडिट नहीं हो जाता, नई स्वीकृति और नियुक्तियां रोकी जाएं।

4. DMFT की वेबसाइट तुरंत अपडेट हो और जनसूचना अधिकारी की नियुक्ति की जाए।

5. भूविस्थापितों के समूहों, महिला स्वसहायता समूहों और सहकारी संस्थाओं को रोजगारमूलक परियोजनाओं में प्राथमिकता मिले।

6. DMF से बने व्यावसायिक भवनों, पर्यटन केंद्रों, पार्किंग, स्कूलों और गार्डनों से होने वाली आय प्रभावितों के लिए सुनिश्चित हो।

7. पुनर्वासित गांवों को प्रथम प्राथमिकता में रखकर विकास योजनाएं बनाई जाएं।

8. भूविस्थापित परिवारों के लिए मुख्य सड़कों पर व्यवसायिक परिसर और पूंजी सहायता दी जाए।

43 प्रभावित गांवों की अनदेखी का आरोप

ग्रामीणों ने बताया कि कोयला खदान से सीधे प्रभावित 43 गांवों की हालत बद से बदतर है। खासकर वे 13 गांव, जिन्हें 7 साल पहले “आदर्श गांव” घोषित किया गया था, आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

जनपद सदस्य, सरपंच और ग्रामीण प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा

“नियम विरुद्ध कार्यों को तुरंत रोका जाए और DMF फंड का उपयोग केवल खनन पीड़ितों के कल्याण में हो।”

सुनवाई के दौरान ग्रामीणों का आक्रोश साफ दिखा। अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो तय करेगी कि हजारों करोड़ का हिसाब सच में पीड़ितों तक पहुंचेगा या फिर सवाल यूं ही दबते