KORBA: अडानी पावर प्लांट विस्तार पर ग्रामीणों का विरोध तेज, “पुराने वादे पूरे करो, तभी नई जनसुनवाई”

 

कोरबा 12 फरवरी 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। अडानी कोरबा पावर प्लांट (पूर्व लैंको) के प्रस्तावित विस्तार को लेकर आसपास के गांवों में विरोध की आवाज बुलंद हो गई है। ग्राम पताढ़ी समेत सरगबुंदिया, अमलीभांठा, पहंदा, धनाधनी, संडेल, बरीडीह, खोड़दल और दर्राभांठा के सैकड़ों ग्रामीणों ने एकजुट होकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक पूर्व में किए गए वादों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक वे नई जनसुनवाई या भूमि अधिग्रहण के लिए सहमति नहीं देंगे।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्ष 2005-06 में प्लांट स्थापना के समय कंपनी प्रबंधन ने भूमि प्रभावित प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने और शिक्षा सुविधाएं विकसित करने का आश्वासन दिया था। हालांकि, उनका कहना है कि केवल जमीन और मकान का मुआवजा दिया गया, जबकि रोजगार और अन्य सुविधाओं से जुड़े वादे आज तक अधूरे हैं। वर्ष 2012-13 में तीसरी और चौथी इकाई के विस्तार के दौरान भी यही आश्वासन दोहराए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिखा।

वर्तमान में संयंत्र की क्षमता लगभग 1600 मेगावाट बताई जा रही है। अब पांचवीं और छठी इकाई के विस्तार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत अतिरिक्त 1600 मेगावाट उत्पादन की तैयारी है। ग्रामीणों का दावा है कि इस विस्तार से 700 से 750 मकान और लगभग 3500 से 4000 की आबादी प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हो सकती है, जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन की आशंका है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कंपनी प्रबंधन के साथ तत्काल त्रिपक्षीय बैठक आयोजित की जाए और पूर्व में किए गए वादों की स्थिति सार्वजनिक की जाए। प्रत्येक प्रभावित परिवार को रोजगार देने की लिखित, समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए तथा पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति को पारदर्शी ढंग से लागू किया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जब तक पुराने दायित्वों का स्पष्ट समाधान नहीं होता, तब तक प्रस्तावित विस्तार प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए।

ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने पुश्तैनी घर, जमीन और आजीविका की रक्षा के लिए शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष करेंगे। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन के रुख पर टिकी हैं।

Ads 1

Ads1

Ads 2

Ads2