CG: बस्तर संभाग के 07 जिलों के 86 प्रकरण में महा जन सुनवाई किया गया जिसमें 12 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया...

 

👉 आपसी राजीनामा से तलाक हेतु उभय पक्ष तैयार 10 लाख एकमुश्त आवेदिका को देगा अनावेदक

👉 महा जन सुनवाई में बस्तर संभाग के सभी जिलों से महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी/ कर्मचारी, संरक्षण अधिकारी, सखी केन्द्र प्रशासिका, विधिक प्राधिकरण एवं पुलिस प्रशासन का सहयोग रहा।

बस्तर 14 मार्च 2026 (नवचेतना न्यूज छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक एवं प्रभारी सदस्य सुश्री दीपिका सोरी व सह प्रभारी सदस्य ओजस्वी मण्डावी द्वारा राज्य की महिलाओं को त्वरित राहत पहुंचाने के उददेश्य से एक वृहद और संवेदनशील निर्यण लिया गया है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आयोग द्वारा आगामी 13 मार्च 2026 को बस्तर संभाग के लिए माह जन सुनवाई सप्ताह का आयोजन कार्यालय कलेक्टर के प्रेरणा कक्ष में किया जा रहा है। आज बस्तर संभाग में 86 प्रकरणों पर महा जन-सुनवाई किया गया। प्रदेश स्तर पर 396 एवं जिला स्तर पर 10 वीं सुनवाई हुई। जिसमें बस्तर संभाग के अंतर्गत आने वाले जिले बस्तर, कोण्डागांव, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर के कुल 86 प्रकरणों की सुनवाई की गई।

इस महा जन सुनवाई में बस्तर संभाग के जिला बस्तर में 14 में से 03, कोण्डागांव में 16 में से 02, सुकमा में 22 में से 03, बीजापुर में 02, नारायणपुर में 06, दंतेवाड़ा में 07 में से 02, कांकेर में 19 में से 02 प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया। दोनों पक्षों की कुल 204 पक्षकारों ने पंजीयन करवाया था, जिसमें अगामी निराकरण हेतु प्रकरण प्रस्तुत किया जायेगा।

एक प्रकरण में आवेदिका व अनावेदक क्र० 03 आपस में भाई-बहन है आवेदिका की मां के नाम पर दर्ज की गई पुस्तैनी जमीन को अना० 03 ने छल-कपट से अपने नाम कराया जिसका पता चलने पर आवेदिका तहसील कार्यालय भखारा गई और अनावेदक 01 के पास आपत्ति प्रस्तुत किया लेकिन उन्होनें 11:00 बजे आपत्ति लेने से इंकार किया और अनावेदक 03 का नाम दर्ज करने अनोदक 02 पटवारी के पास भेज दिया और आवेदिका को जो व्यवहार के प्रकाशन की तिथि 08.02 2026 के दिन अनावेदक 01 व 02 ने ईतनी जल्दबजी दिखाई की 11:00 बजे ही अनावेदक क० 03 के पक्ष में नामांतरण प्रक्रिया पूरी कर दी और अनावेदिका का शिकायत आवेदन नहीं लिया। इस मामले में कलेक्टर धमतरी को तत्काल पत्र भेजकर अनावेदक 01 व 02 के विरूद्ध शो कॉज नोटिस जारी करें। प्रकरण दिनांक 07 अप्रैल 2026 को सुनवाई हेतु रायपुर में रखा जाता है, चूंकि आवेदिका 09 माह की गर्भवती है अतः वह अपना कथन हलक नामे के साथ भिजवा सकती है तथा पेन ड्रावई व दस्तावेजों के साथ भिजवा सकती है। प्रकरण अति गंभीर है संपत्ति पर महिला का हक समाप्त करने की कुचेष्टा तहसीलदार व पटवारी ने की है। आवेदिका ने बताया कि, आवेदिका के हिस्से की कीमत लगभग साढ़े चार-पांच करोड़ है, जिस जमीन पर आवेदिका का नाम काटकर अनावेदक 03 का चढ़ाने का षडयंत्र अनावेदक 01 और 02 ने किया है। प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु रायपुर में रखा जाये उसके पूर्व ही कलेक्टर धमतरी को पत्र भेजा जाए और आगामी सुनवाई हेतु 07 अप्रैल 2026 को रायपुर में रखा जाए।

एक अन्य प्रकरण में अनावेदक क्र० 01 मा०शा० नवागांव वि०खं० अंतागढ़ शिक्षक वर्ग 02 जिसका मासिक वेतन 80,000/- रूपये है। उसने अनावेदक 02 चमेली मण्डावी से दूसरा विवाह किया है, जिसका 06 माह का पुत्र है जिसका नाम मयंक है। जबकि आवेदिका उसकी विधिवत विवाहित पत्नि है और अनावेदक 01 शासकीय सेवा में शिक्षक है और जानते हुए भी सिविल सेवा नियम का उल्लंघन किया है. जिसके आधार पर उसकी सेवा समाप्ति भी हो सकती है। उभय पक्ष ने बताया कि, उनका मामला भानुप्रतापुर परिवार न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका और अनावेदक 01 आपस में पति-पत्नि है।अनावेदक 01 दूसरी पत्नि है और उसका 08 साल का पुत्र है। आयोग के द्वारा समझाईश दिए जाने पर आवेदिका को एकमुश्त भरण-पोषण देने अनावेदकगण तैयार है विचार के लिए समय दिया गया। पुनश्चः उभय पक्ष के मध्य यह तय हुआ कि, अनावेदकगण आवेदिका को एकमुश्त भरण-पोषण 10 लाख की राशि 03 किश्तों में देंगे और उसके अतिरिक्त कुछ भी लेना या देना बाकी नहीं रहेगा। आवेदिका और अनावेदक 01 आपसी राजीनामा से तलाक की प्रकिया कुटुंब न्यायालय जगदलपुर में प्रस्तुत करेंगे। प्रकरण की निगरानी माननीय सदस्यगण सोरी जी व मण्डावी जी करेंगे एवं संरक्षण अधिकारी श्रीमती वीनू हिरवानी उनकी मदद करेंगे। आपसी राजीनामा से तलाक नामा की प्रक्रिया हेतु वकील नियुक्त किया जायेगा जिसकी फीस दोनों पक्ष मिलकर देंगे। प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है। निःशुल्क प्रति पी० ओ० को दी जाती है।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका व अनावेदक दोनों के मध्य वैवाहित संबंध था 15 वर्ष से अलग-अलग हैं। आवेदिका को अनावेदक एकमुश्त भरण-पोषण 75,000/- रूपये देने को तैयार है, जिसकी अदायगी माननीय सदस्य सुश्री दीपिका सोरी के समक्ष किया जायेगा। प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका व अनावेदक दोनों के मध्य पूर्व में भी शिकायतें हुई थी, जिसमें न्यायालय में सुलहनामा हो चुका है। अनावेदक को समझाईश दिया गया कि, वह सभी आवेदिका को किसी भी प्रकार से शारीरिक / मानसिक रूप से प्रताड़ित नहीं करेंगे। यदि वह दोबारा कहता है, तो आवेदिका थाने में एफ०आई०आर० दर्ज करवा सकती है। प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका यह कहती है कि, उसने आवेदकगणों के खिलाफ शिकायत नहीं की है, जबकि आवेदन के पिछले पन्ने पर इन सभी अनावेदकगणों का नाम लिखा है। ऐसी स्थिति में प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

एक अन्य प्रकरण में अनावेदक क्र० 02 अनुपस्थित लेकिन अनावेदक क्र0 01 उपस्थित है। आवेदिका से विवाह कर अनावेदक ने उसे छोड़ कर दूसरा विवाह कर लिया है, जिससे उसका 01 वर्ष का बेटा है। 02 वर्ष से आवेदिका अलग रह रही है। आवेदिका के नाम पर मकान अनावेदक बनवा चुका है जिसमें दोनों ने मिलकर पैसा लगाया है। उस पर आवेदिका का एकमात्र का कब्जा होगा। अनावेदक कोई दखल नहीं देगा। इसके अतिरिक्त प्रतिमाह आवेदिका के एकाउंट में 6000/- रूपये जमा करेगा। यदि अनावेदक इन शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसकी शासकीय सेवा समाप्त करने का आयोग अनुशंसा करेगा। इस प्रकरण की 01 वर्ष तक नियमित निगरानी माननीय सदस्य शोरी द्वारा किया जाएगा।

एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने अपना दस्तावेज पेश कर बताया कि, लगभग 20 वर्ष से मामला चलने के बाद अनावेदक को पट्टा मिला था. इस तथ्य को आवेदन में छुपाया गया है। अतः इस तथ्य को आयोग में सुना जाना संभव नहीं है, आवेदिका उपयुक्त व्यायालय में मामला दर्ज कर सकती है। उक्त प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाता है।

एक अन्य प्रकरण में थाना किरन्दुल से उप निरीक्षक द्वारा दस्तावेज पेश किया गया। आवेदिका एवं उनके पड़ौसी के उपर काउण्टर केस बना है और एक इस्तमाशा भी पेश किया है, इस स्तर पर प्रकरण नस्तीबद्ध किये जाने योग्य है, आवेदिका चाहे तो न्यायालय में प्रकरण दर्ज कर सकती है। उक्त प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका संविदा सेवा में है एवं अनावेदक नियमित सेवा में है। दोनों के मध्य विवाद हेतु आवेदिका ने CMHO एवं कलेक्टर बीजापुर को आवेदन दिया था, लेकिन अब तक कोई कार्यवाही नहीं किया गया। आयोग द्वारा एक पत्र कलेक्टर को भेजा जायेगा और 02 माह के अंदर रिपोर्ट मिलने पर आगामी कार्यवाही किया जायेगा। प्रकरण आगामी सुनवाई हेतु 02 माह पश्चात् रखा जायेगा।

एक अन्य प्रकरण में अनावेदकगणों ने बताया कि आवेदकों ने शासकीय भूमि पर कब्जा कर लिया है, जिसे हटाने की प्रक्रिया चल रही है, ऐसी स्थिति में प्रकरण चलने योग्य नहीं है। अतः प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका का बेटा 17 वर्ष की उम्र में अनावेदिका क्र० 01 के साथ डांस सिखता था और धीरे-धीरे किन्नर बनने का प्रयास कर रहा था। उसे रोकने का प्रयास करने पर उसने दिनांक 14.11.2025 को फांसी लगा ली और उसकी मृत्यु हो गई। इस कारण आवेदिका अपना प्रकरण आगे नहीं बढ़ाना चाहती। अनावेदकगण को समझाया गया कि, वे आवेदिका के घर-परिवार में किसी प्रकार की दखल न दें और ना ही परेशान करें। इस समझाईश के साथ प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका और अना. एक ही स्कूल में अध्ययनरत् हैं और अपनी जिम्मेदारी के मामलों को लेकर आयोग के समक्ष उपस्थित हैं आंतरिक समिति में कार्यवाही प्रक्रियाधीन है अतः जिला शिक्षा अधिकारी से प्रतिवेदन मंगवाया जयेगा उसके पश्चात् ही निर्णय लिया जायेगा।

एक अन्य प्रकरण में अना. क. 02 अनुपस्थित लेकिन अनावेदक क्र०-01 अपस्थित है। आवेदिका से विवाद कर अना. ने उसे छोड़ कर दूसरा विवाह कर लिया है, जिससे उसका 01 वर्ष का बेटा है। 02 साल से आवेदिका अलग रह रही है। आवेदिका के नाम पर एक मकान अनावेदक बनवा चुका है। जिसमें दोनों ने मिलकर पैसा लगाया था उस पर आवेदिका का एकमात्र का कब्जा होगा। अना. कोई दखल नहीं देगा। इसके अति. प्रतिमाह आविदिका के अकाउंट में 6000/- जमा करेगा। यदि अना. इन शर्तों का उल्लंघन करता है तो उसकी अनुशंसा करेगा। इस प्रकरण की 01 वर्ष तक नियमित निगरानी मान, सदस्य शोरी द्वारा किया जायेगा।

एक अन्य प्रकरण में दोनो ने अपने प्रकरण का संक्षिप्त सार आज प्रस्तु किया है दोनों के कथनों से यह स्पष्ट है कि सहा. आयुक्त आदिम जाति कल्याण विभाग से इस प्रकरण के बाकियों की जानकारी देना आवश्यक होगा। अतः मान. सदस्य दीपिका शोरी आज ही फाईल पर चर्चा कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अना. 01 उसका पति है। उसने बिना तलाक लिये दूसरी शादी की जिससे उसके 02 बच्चे हैं। फिर भी आवेदिका आपत्ति नहीं कर रही है। लेकिन अनावेदकगण आवेदिका के मकान से उसे खाली कराना चाहते हैं जो अवैधानिक है। उसे मकान से खाली नही कराया जा सकता। प्रकरण नस्तीबद्ध किया गया।

एक अन्य प्रकरण में आवेदिकागणों ने बताया कि, इस अनावेदक ने इनके समूह से 1.5 लाख रूपये महिन्द्र पिकअप फाईनेंस कर खरीदने के लिये लिया था और अभी तक नहीं लौटा रहा है। अनावेदक सहायक ग्रेड 02 स्वामी आत्मानंद विद्यालय में संविदा कर्मी के रूप में कार्यरत् हैं। 25,000/- रूपये मासिक वेतन है। इसके पूर्व जिला पंचायत सुकमा में लगभग 06 वर्ष कार्य किया। उस समय सभी आवेदिकागण इस अनावेदक के अधीनस्थ कार्यरत् थे। समूह का सारा कार्य इस अनावेदक के माफिक होता था। उस समय अनावेदक को 14000/- रूपये वेतन मिलता था। अनावेदक ने यह स्वयं स्वीकार किया है कि वह आवेदिकागणों का बिजनेस पार्टनर था। अतः उस नाते उसका कमीशन बनता था। आयोग के समक्ष आज अनावेदक ने शबरी मार्ट के नाम से दिनांक 25.10.2021 को 12 लाख 22 हजार का एक बिल मूलतः प्रस्तुत किया। आवेदक से पूछा गया कि, वह शासकीय सेवा की आड़ में कमीशन खोरी का कार्य कैसे बना रहा है, उसने कहा उच्चाधिकारी ने कहा, फिर कहा कलेक्टर ने कहा था। लिखित आदेश कुछ नहीं है, इससे स्पष्ट है कि, अनावेदक शासकीय कार्यालय में काम करने की आड़ में SHG का शोषण कर रहा है। इस आधार पर उसकी शा० सेवा समाप्त की जा सकती है और एफ०आई०आर० दर्ज किये जाने के प्र्याप्त आधार है। इस स्तर पर अनावेदक ने सभी आवेदिकाओं से आयोग के समक्ष माफी मांगा और 1.5 लाख को 06 किश्तों में वापस करने का वादा किया है। इसी माह से सखी सेंटर सुकमा में सखी प्रशासिका, पी०ओ० और आयोग के सदस्य मान० शोरी के समक्ष निर्धारित की गयी तिथि पर प्रतिमाह 25,000/- रूपये वापस करेगा। यह फाईल मूलतः दीपिका शोरी जी को दिया जाता है। 06 माह पश्चात् प्रकरण नस्तीबद्ध किया जाएगा।

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