बालको में गरमाया श्रमिक आंदोलन, अमित जोगी का ‘खटिया खड़ी आंदोलन’, प्रबंधन पर बढ़ा दबाव

 

कोरबा 13 मार्च 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। औद्योगिक नगरी बालको में श्रमिकों के शोषण और स्थानीय लोगों की अनदेखी के आरोपों को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन शुक्रवार को उस समय सुर्खियों में आ गया, जब अमित जोगी आंदोलन स्थल पर पहुंच गए। उनके पहुंचते ही आंदोलन को नया राजनीतिक आयाम मिल गया और प्रदर्शनकारियों का उत्साह भी बढ़ गया।

खटिया बिछाकर जताया अनोखा विरोध

अमित जोगी ने आंदोलन स्थल पर खटिया (चारपाई) बिछाकर उस पर बैठते हुए अपना विरोध दर्ज कराया, जिसे उन्होंने ‘खटिया खड़ी आंदोलन’ का नाम दिया। इस दौरान उन्होंने मजदूरों और स्थानीय लोगों की समस्याएं सुनीं और आरोप लगाया कि बालको प्रबंधन लंबे समय से उनकी मांगों को नजरअंदाज कर रहा है।

गेट के सामने टेंट, पुलिस से हुई खींचातानी

जानकारी के अनुसार, जोगी परसाभाटा क्षेत्र में बालको गेट के सामने टेंट लगाकर धरने पर बैठे। बाद में वे वहां मौजूद मजदूरों और समर्थकों के साथ गेट की ओर बढ़ने लगे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान कुछ देर तक हल्की खींचातानी की स्थिति भी बनी रही। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए प्रशासन ने मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर रखा था और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी रही।

पिता के आंदोलन की दिलाई याद

मीडिया से चर्चा में अमित जोगी ने कहा कि उनके पिता और पूर्व मुख्यमंत्री अमित जोगी ने वर्ष 2004 में बालको में मजदूरों के अधिकारों के लिए बड़ा आंदोलन किया था। उसी की तर्ज पर उन्होंने भी असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के हक में यह संघर्ष किया है।

तीन मांगें मानने का दावा, आंदोलन समाप्त

अमित जोगी ने दावा किया कि उनके खटिया खड़ी आंदोलन की तीन प्रमुख मांगों को बालको प्रबंधन ने स्वीकार कर लिया है। इसी के साथ कुछ ही घंटों के भीतर आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी गई।

लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया

आंदोलन के अचानक समाप्त होने पर क्षेत्र में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोग अमित जोगी के प्रयास को मजदूरों की जीत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे प्रबंधन और प्रशासन की रणनीति मान रहे हैं।

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