प्राप्त जानकारी के अनुसार 10 अप्रैल 2026 को मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा निर्माण स्थल का निरीक्षण किया गया, जिसमें सी.सी. रोड का कार्य निम्न स्तर का पाया गया। जांच में सामने आया कि तकनीकी एवं प्रशासनिक स्वीकृति के निर्देशों का पालन नहीं किया गया तथा कार्य में लापरवाही और मनमानी बरती गई।
सचिव श्रीमती लीला कमलेश को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब में उन्होंने बताया कि वे नियमित निरीक्षण करती थीं तथा ट्रैक्टरों के आवागमन से सड़क क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत भी कराई गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उप अभियंता और एसडीओ के निरीक्षण के बाद कार्य को सही माना गया तथा 20 प्रतिशत भुगतान भी स्वीकृत हुआ।
हालांकि जांच में यह तथ्य सामने आया कि 6 नवम्बर 2025 को जारी गुणवत्ता प्रमाण पत्र कूट रचित दस्तावेज के आधार पर तैयार किया गया था। इससे शासकीय राशि के दुरुपयोग की आशंका जताई गई। स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाए जाने पर सचिव को छत्तीसगढ़ पंचायत सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम 1999 के तहत तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय जनपद पंचायत जैजैपुर निर्धारित किया गया है तथा नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा।
वहीं, सरपंच श्रीमती जयमति के मामले में भी जांच के दौरान गंभीर लापरवाही सामने आई है। उन्हें जारी नोटिस के जवाब में उन्होंने निर्माण कार्य अनुबंध के माध्यम से कराए जाने और अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्य पूर्ण होने की बात कही, साथ ही सड़क क्षतिग्रस्त होने पर मरम्मत कराने का दावा किया।
इसके बावजूद जांच में गुणवत्ता प्रमाण पत्र को फर्जी पाया गया तथा निर्माण कार्य अत्यंत निम्न स्तर का मिला, जिससे सड़क उखड़ने की स्थिति में है। इसे पंचायत राज अधिनियम 1993 के प्रावधानों का उल्लंघन मानते हुए सरपंच के विरुद्ध धारा 39 के तहत कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है और आगे की प्रक्रिया धारा 40 के अंतर्गत जारी है।
प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और निर्माण कार्यों में पारदर्शिता एवं गुणवत्ता को लेकर सख्त संदेश गया है।
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