नगर-निगम रायपुर के मृत कर्मचारी के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति देने की अनुशंसा महिला आयोग

 

रायपुर 22 जून 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्यगण श्रीमती सरला कोसरिया, श्रीमती ओजस्वी मण्डावी एवं सुश्री दीपिका शोरी ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर मे महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 398 वी एवं रायपुर जिले में 187 वी. जनसुनवाई की गई।

आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसका बेटा व अनावेदिका बहू की डेढ़ वर्षीय पुत्री है। जो अनावेदिका बहू के साथ रहती है। आवेदिका ने बताया कि अनावेदिका बहू 04 माह की उम्र में बच्ची को छोड़कर चली गई थी। 02 दिन बाद पता चला कि वह अपने मायके में है। इसके बाद आवेदिका ने बच्ची को 01 सप्ताह बाद थाने से प्राप्त किया था। पिछले एक साल से आवेदिका व उसके बेटे ने बच्ची को नही देखा था। आयोग के द्वारा अनावेदिका बहू को समझाईश दिये जाने पर वह इस बात के लिए तैयार है कि आवेदिका पक्ष महिने में 01 बार उसके मायके आकर बच्ची से मिल सकेंगे व आवेदिका का बेटा प्रतिमाह एक हजार रू. भरण-पोषण आवेदिका को देगा। उभय पक्ष इस बात पर सहमत हुए सहमति के पश्चात् प्रकरण नस्तीबध्द किया गया। 


एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि उसका पति नगर-निगम में चैकीदार के पद पर था, जिसका निधन 18.04.2016 को हो गया। अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन जमा होने के बाद भी आवेदिका और उनके बच्चे किसी को नगर-निगम रायपुर द्वारा अनुकंपा नियुक्ति नही दिया गया है। आवेदिका के स्व. पति को भी उनके पिता के स्थान पर ही अनुकंपा नियुक्ति मिली थी और आवेदिका के पति की मृत्यु सेवा काल के दौरान ही हुई आज दिनांक तक आवेदिका और उसके बालक को शिक्षित होने के बाद भी नियुक्ति नही दिया गया। नगर पालिका निगम रायपुर में आवेदिका के पुत्र को अनुकंपा नियुक्ति हेतु आयोग की ओर से अनुशंसा की जायेगी।

 एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक के नर्सिंग होम में सरोगेसी के माध्यम से उनके जुडवा बच्चे दिनांक 25.12.2023 को हुआ था। उन्हें बताया गया था कि एक लड़का और एक लड़की है। अनावेदक हाॅस्पिटल के द्वारा आवेदिका के लडके को बदलकर उसे दूसरी लड़की दे दी गई। जिसका डी.एन.ए माता-पिता से नहीं मिलता है। जिसकी शिकायत खम्हारडीह थाना में भी की गई थी। आवेदिका को न्याय नही मिलने पर उसने महिला आयोग में शिकायत दर्ज करायी। आवेदिका ने आयोग के समक्ष जानकारी दिया कि उसके गुम बेटे को दंतेवाडा के किसी अनुसूचित जनजाति(आदिवासी) परिवार को पुलिस प्रशासन के द्वारा दिया गया है। इस बच्चे को अनावेदक हाॅस्पिटल द्वारा बेचा गया था। आवेदिका और उसके पति लगातार बच्चे की तलाश कर रहे थे। खरीददार साहू दम्पत्ति ने 09 माह के बच्चे को कोरेगांव धमतरी के जंगल में छोड़ दिया था। थाने वालो ने आश्रम प्रशासन, दंतेवाडा को सौंप दिया है। ऐसी स्थिति में आवेदिका चाहती है कि बच्चे, आवेदिका और उसके पति का डी.एन.ए टेस्ट कराया जाये। आयोग द्वारा इस हेतु महिला आयोग की सदस्यगण दंतेवाडा कलेक्टर व एस.पी से मिलकर डी.एन.ए टेस्ट की प्रक्रिया करायेंगी, ताकि आवेदिका के शक की पुष्टि की जा सके व आवेदिका को न्याय मिल सके।

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