कोरबा 20 अगस्त 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। कटघोरा थाना क्षेत्र के एक धोखाधड़ी मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली गई पुलिस टीम पर आईजी ने बड़ी कार्रवाई की है। रेंज कार्यालय से टीम को ट्रेन से दिल्ली जाने की अनुमति मिली थी, लेकिन टीम के कुछ पुलिसकर्मी बिना अनुमति हवाई यात्रा कर दिल्ली पहुंच गए। इस मामले को पदीय दायित्वों में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता मानते हुए पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने कार्रवाई की है।
इस मामले में निरीक्षक मोतीलाल पटेल, एएसआई राम पांडेय और आरक्षक प्रदीप राठौर पहले ही एक अन्य मामले में 17 अगस्त को पुलिस अधीक्षक कोरबा द्वारा निलंबित किए जा चुके थे। वहीं अब इसी घटनाक्रम में प्रधान आरक्षक गुना सिन्हा, प्रधान आरक्षक राजेश कंवर, प्रधान आरक्षक गोपाल यादव, आरक्षक सुशील यादव और आरक्षक प्रशांत सिंह को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि में सभी का मुख्यालय रक्षित केंद्र कोरबा निर्धारित किया गया है।
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पहुंची थी टीम
मामला कटघोरा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 175/26 से जुड़ा है। पुलिस के मुताबिक प्रकरण में आरोपी संदीप कालरा और जसमीत सिंह पुलिस के बुलावे के बावजूद कटघोरा नहीं पहुंच रहे थे। इसके बाद अधिकारियों के मार्गदर्शन में थाना और साइबर टीम को दिल्ली भेजने की तैयारी की गई। टीम का नेतृत्व टीआई मोतीलाल पटेल कर रहे थे।
टीम को ट्रेन से रवाना होने की अनुमति दी गई थी, लेकिन पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों के विदेश जाने की संभावना की सूचना मिलने के बाद टीम ने तत्काल दिल्ली पहुंचने के लिए हवाई यात्रा का रास्ता अपनाया। टीम दिल्ली पहुंची और पटेल नगर थाना पुलिस के सहयोग से दोनों आरोपियों के ठिकाने पर दबिश देकर उन्हें हिरासत में ले लिया।
गिरफ्तारी के बाद भी आरोपियों को छोड़ना पड़ा
दोनों आरोपियों को पटेल नगर थाने लाया गया। आवश्यक कागजी कार्रवाई और मेडिकल परीक्षण के बाद उन्हें स्थानीय अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू की गई। हालांकि अदालत ले जाते समय पुलिस टीम को सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला मिला।
मामले में संबंधित धाराओं के तहत अधिकतम सजा सात वर्ष तक होने के कारण गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए। इसके बाद दोनों आरोपियों को छोड़ना पड़ा। पुलिस ने उन्हें नोटिस जारी कर कटघोरा थाना में उपस्थित होकर जांच में सहयोग करने के लिए कहा।
फ्लाइट से दिल्ली जाने का खर्च बना सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस टीम की हवाई यात्रा भी जांच के दायरे में आ गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब टीम को सरकारी अनुमति ट्रेन से जाने की थी, तो बिना अनुमति विमान से दिल्ली जाने का खर्च किसने उठाया?
मामले के प्रार्थी ने पुलिस टीम को हवाई यात्रा का खर्च दिए जाने से इनकार किया है। ऐसे में अब यह जांच का विषय है कि विमान यात्रा का भुगतान सरकारी मद से हुआ, किसी अन्य माध्यम से किया गया या पुलिसकर्मियों ने स्वयं खर्च उठाया।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन बनी गिरफ्तारी में अड़चन
कानूनी जानकारों के अनुसार अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सात वर्ष या उससे कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। ऐसे मामलों में केवल एफआईआर दर्ज होने या अपराध के गैर-जमानती होने के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती।
गिरफ्तारी के लिए पुलिस को यह बताना होता है कि आरोपी को गिरफ्तार करना क्यों जरूरी है और संबंधित परिस्थितियों को केस डायरी में दर्ज करना होता है। यदि गिरफ्तारी की आवश्यकता का पर्याप्त आधार नहीं हो तो न्यायालय के स्तर पर आरोपी को राहत मिल सकती है।
इसी कानूनी स्थिति के चलते दिल्ली में पकड़े गए दोनों आरोपियों को अंततः नोटिस देकर छोड़ना पड़ा और कोरबा पुलिस टीम को खाली हाथ लौटना पड़ा।
दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट का भी खटखटाया दरवाजा
बताया जा रहा है कि जुलाई में कोरबा पुलिस की कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। न्यायालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई है। ऐसे में आगे की कानूनी प्रक्रिया हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार चलेगी।
क्या है पूरा मामला?
कटघोरा थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 175/26 की शुरुआत जेसीबी इंडिया लिमिटेड की डीलरशिप से जुड़े विवाद से हुई। परिवादी के अनुसार उसने वर्ष 2017-18 से छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों में डीलरशिप के तहत जमीन, भवन, शोरूम, सर्विस सेंटर, मशीनरी, फर्नीचर, स्टॉक और डेमो मशीन सहित विभिन्न मदों में करीब 50 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
आरोप है कि वर्ष 2022 के बाद कंपनी के अधिकारियों संदीप कालरा और जसमीत सिंह द्वारा डीलरशिप के नवीनीकरण और एक्सटेंशन को लेकर दबाव बनाया गया तथा आर्थिक मांगें पूरी नहीं करने पर डीलरशिप समाप्त करने की धमकी दी गई।
परिवादी ने यह भी आरोप लगाया कि अलग-अलग समय पर डीलरशिप अनुबंध की अवधि में बदलाव किया गया। जनवरी 2025 की बैठक में डीलरशिप आगे जारी रखने पर सहमति बनने के बावजूद बाद में उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में अलग शर्तें सामने आईं। परिवादी ने दस्तावेजों में उसकी जानकारी और सहमति के बिना बदलाव किए जाने का आरोप लगाया।
मामले से जुड़े दस्तावेजों और घटनाक्रम को देखने के बाद न्यायालय ने प्रथम दृष्टया आरोपों को गंभीर माना। न्यायालय के आदेश के बाद कटघोरा पुलिस ने 22 मई 2026 को संदीप कालरा और जसमीत सिंह के खिलाफ धारा 318 एवं 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की।
अब इस पूरे प्रकरण में पुलिस टीम की दिल्ली यात्रा, बिना अनुमति हवाई सफर और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उन्हें छोड़े जाने का घटनाक्रम भी चर्चा में है। आईजी की कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में इसे लेकर खलबली मची हुई है।
