KORBA: निर्माण पूरा होने से पहले धंसने लगी करोड़ों की नहर, गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल

 

कोरबा 31 अगस्त 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। बरसात के बीच कोरबा शहर क्षेत्र में करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से कराए जा रहे नहर मरम्मत एवं निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत मानसनगर नहर से सोनालिया पुल तक नहर के मरम्मत एवं निर्माण का कार्य जारी है। बताया जा रहा है कि निर्माण कार्य अभी पूरा भी नहीं हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर नहर की दीवारों में दरारें पड़ने और कुछ हिस्सों के धंसने की स्थिति सामने आई है।

मौके से सामने आई तस्वीरों में नहर की दीवारों में दरारें, कंक्रीट की परत टूटने और कुछ हिस्सों के नीचे की ओर खिसकने के निशान दिखाई दे रहे हैं। वहीं, दीवारों के ऊपरी हिस्से में मिट्टी का कटाव भी नजर आ रहा है। निर्माणाधीन नहर की मौजूदा स्थिति ने कार्य की गुणवत्ता और निर्माण में निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बारिश बढ़ा सकती है परेशानी

लगातार बारिश के दौरान नहर में पानी का दबाव बढ़ने पर कमजोर हिस्सों के और अधिक क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है कि निर्माण के दौरान बेस की मजबूती, मिट्टी की गुणवत्ता, जल निकासी और कंक्रीट कार्य में निर्धारित तकनीकी मापदंडों का कितना पालन किया गया।

पेटी ठेकेदार से काम कराने की चर्चा

विभागीय स्तर पर सामने आ रही जानकारी के अनुसार, उक्त कार्य का ठेका विष्णु अग्रवाल से संबंधित बताया जा रहा है। वहीं, मौके पर निर्माण कार्य पेटी ठेकेदार के माध्यम से कराए जाने की चर्चा भी है। हालांकि, पेटी ठेकेदार की भूमिका, निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री और कार्य की गुणवत्ता को लेकर विभाग की ओर से अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

तकनीकी जांच की उठी मांग

नहर की दीवारों में निर्माण पूरा होने से पहले ही सामने आ रही खामियों को देखते हुए स्थानीय स्तर पर तकनीकी जांच और मौके के निरीक्षण की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि जहां-जहां नहर क्षतिग्रस्त हुई है, वहां केवल ऊपरी तौर पर मरम्मत करने के बजाय तकनीकी मानकों के अनुसार स्थायी सुधार किया जाना चाहिए।

करीब 7 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इस महत्वपूर्ण कार्य में यदि निर्माण पूरा होने से पहले ही खामियां सामने आ रही हैं, तो पूरे कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है। अब देखना होगा कि जल संसाधन विभाग मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर क्या कदम उठाता है।

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