पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आए नागरिक, पंचामृत वृक्ष लगाने पर जोर - नाडीवैध डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा

 

कोरबा 05 जून 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति संवर्धन का संदेश देते हुए नागरिकों से अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने की अपील की गई। इस अवसर पर कहा गया कि शुद्ध वायु, स्वच्छ जल और पौष्टिक अन्न मानव जीवन के प्रमुख आधार हैं, जिनमें वायु का महत्व सबसे अधिक है।

विशेषज्ञों के अनुसार एक सामान्य व्यक्ति प्रतिदिन लगभग 1 किलो अन्न और 2 किलो जल ग्रहण करता है, जबकि लगभग 10 हजार लीटर वायु का सेवन करता है। ऐसे में स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ एवं शुद्ध वातावरण अत्यंत आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण में पीपल, वट (बरगद), तुलसी, आँवला और नीम को विशेष महत्व दिया गया है। इन्हें जीवनदायी एवं स्वास्थ्यवर्धक "पंचामृत वृक्ष" माना जाता है। ये वृक्ष न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं बल्कि मानव स्वास्थ्य और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पीपल : पर्यावरण का प्राकृतिक रक्षक

पीपल का वृक्ष प्रदूषण नियंत्रण, वायु शुद्धिकरण और पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वातावरण में मौजूद धूल और धुएं को अवशोषित कर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने में सहायक होता है। इसके संपर्क और छाया में समय बिताने से मानसिक शांति एवं सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होने की मान्यता है।

आँवला : स्वास्थ्य और ऊर्जा का स्रोत

आँवला औषधीय गुणों से भरपूर वृक्ष है। इसके फल और वृक्ष दोनों ही स्वास्थ्यवर्धक माने जाते हैं। यह वातावरण की शुद्धता बढ़ाने के साथ-साथ शरीर में ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक क्षमता के विकास में सहायक माना जाता है।

तुलसी : प्राकृतिक वायु शोधक

तुलसी को प्रदूषण नियंत्रण में अत्यंत उपयोगी पौधा माना गया है। यह वातावरण को स्वच्छ रखने, बैक्टीरिया और हानिकारक तत्वों को कम करने तथा घर-आंगन में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने में सहायक है।

वटवृक्ष : जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का आधार

बरगद का वृक्ष भूमि संरक्षण, जल संतुलन और पर्यावरणीय स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी विशाल छाया और दीर्घायु प्रकृति इसे विशेष बनाती है। इसके विभिन्न भाग औषधीय उपयोग में भी आते हैं।

नीम : प्राकृतिक औषधालय

नीम अपने औषधीय और कीटाणुनाशक गुणों के लिए प्रसिद्ध है। इसकी पत्तियां, फल, फूल, छाल और लकड़ी सभी उपयोगी माने जाते हैं। नीम का वृक्ष वातावरण को शुद्ध रखने और विभिन्न रोगों से बचाव में सहायक माना जाता है।

वृक्षारोपण का लें संकल्प

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर नागरिकों से अपील की गई कि वे केवल स्वयं वृक्षारोपण न करें, बल्कि समाज के अन्य लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रत्येक व्यक्ति का छोटा प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकता है।

"प्रकृति का न करें हरण, आइए बचाएं पर्यावरण" के संदेश के साथ पर्यावरण संरक्षण को जन-जन का अभियान बनाने का आह्वान किया गया।

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