कोरबा 08 जून 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा हाल ही में जारी कार्यालयीन आदेश के तहत किए गए पदस्थापना फेरबदल को लेकर कर्मचारियों और विभागीय जानकारों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। विशेष रूप से लेखा शाखा में किए गए बदलाव को लेकर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर चर्चा तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, सहायक लेखाधिकारी पद पर कार्यरत श्रीमती शिवकुमारी यादव, जो लेखा शाखा में पद के अनुरूप कार्य कर रही थीं, उन्हें उनके मूल कार्य से हटाकर स्थापना शाखा में भेज दिया गया है। वहीं, उनकी जगह सहायक कार्यालय अधीक्षक श्री अरविंद वानखेड़े को लेखा शाखा में पदस्थ किया गया है।
निगम के अंदर चर्चा का विषय यह बना हुआ है कि यदि संबंधित अधिकारी ने लेखा प्रशिक्षण/लेखा अर्हता पूर्ण नहीं की है, तो फिर उन्हें लेखा संबंधी जिम्मेदारी किस आधार पर सौंपी जा रही है? कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या अनुभवी और पद के अनुरूप कार्य कर रहे कर्मचारियों को हटाकर प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित की जा रही है?
इसी के साथ निगम में हुए अन्य फेरबदल को लेकर भी असंतोष की स्थिति बताई जा रही है। कई कर्मचारियों का कहना है कि युवा कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों में कार्य सीखने और अनुभव प्राप्त करने का अवसर नहीं मिल पा रहा, जबकि कुछ सीमित कर्मचारियों के बीच ही जिम्मेदारियों का बार-बार फेरबदल किया जा रहा है।
इसके अलावा, निगम में ऐसे कई कर्मचारी भी बताए जा रहे हैं, जो वर्षों से संबंधित कार्यों में अनुभव रखते हैं तथा जिम्मेदारी संभालने के योग्य माने जाते हैं, लेकिन उन्हें अवसर देने के बजाय पदस्थापना में नजरअंदाज किया जा रहा है। कर्मचारियों के बीच यह चर्चा है कि ऐसे अनुभवी कर्मचारियों को अवसर न देकर बार-बार सीमित लोगों के बीच ही जिम्मेदारियों का फेरबदल क्यों किया जा रहा है।
विभागीय कर्मचारियों का यह भी कहना है कि निगम के कई विभागों में आगामी वर्षों में कुछ अनुभवी कर्मचारी सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के करीब हैं, ऐसे में प्रशासनिक दृष्टिकोण से कार्य की निरंतरता बनाए रखने हेतु अनुभवी कर्मचारियों के साथ-साथ अन्य कर्मचारियों को भी विभागीय कार्य सीखने एवं अनुभव प्राप्त करने का अवसर दिया जाना उचित माना जा सकता है, ताकि भविष्य में विभागीय कार्य प्रभावित न हों। लेकिन कर्मचारियों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि इस दिशा में अपेक्षित प्राथमिकता क्यों नहीं दिखाई दे रही।
👉 अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि —
1. क्या निगम स्तर पर इन पदस्थापनाओं में योग्य एवं अनुभवी कर्मचारियों की अनदेखी हो रही है?
2. क्या वरिष्ठ अधिकारियों तक वास्तविक तथ्य सही तरीके से नहीं पहुंचाए जा रहे?
3. या फिर प्रशासनिक स्तर पर लिए जा रहे निर्णयों में पारदर्शिता की कमी है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है?
निगम से जुड़े लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पदस्थापनाएं प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर हुई हैं या फिर कहीं न कहीं योग्य कर्मचारियों की उपेक्षा की जा रही है।
अब देखना होगा कि आयुक्त द्वारा कार्यालय में इन उठ रहे सवालों पर क्या संज्ञान लेते है और क्या निगम प्रशासन इस विषय में कोई पुनर्विचार करता है।


