रायपुर 09 मई 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 397 वी. एवं रायपुर जिले में 186 वी. जनसुनवाई की गई।
आज की सुनवाई के दौरान एक प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक होमगार्ड, नगर सैनिक आरक्षक नं. 221 जिला- गरियाबंद मे पदस्थ है। उसने आवेदिका को धोखा देकर विधिवत् शादी किया। शादी के बाद पता चला कि आवेदिका उसकी तिसरी पत्नी है। आयोग द्वारा अनावेदक की सेवा समाप्ति हेतु शोकाॅज नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
एक प्रकरण के दौरान आवेदिका और अनावेदक पति-पत्नि है। अनावेदक शासकीय शाला, जिला- गरियाबंद में लगभग 13 वर्ष से शिक्षक का कार्य कर रहा है और प्रतिमाह 65 हजार रू. वेतन प्राप्त करता है। शासकीय सेवा में रहते हुए अनावेदक ने अपनी पत्नि से तलाक लिये बिना दूसरी महिला से विवाह कर लिया है जिससे लगभग 4 वर्ष का एक बेटा है। और आवेदिका से उसकी एक बेटी है। अनावेदक शासकीय सेवा में होते हुए सिविल सर्विसेस रूल्स का उल्लंघन कर रहा है। अनावेदक ने स्वीकार किया कि उसने पहली पत्नि से तलाक लिये बिना दूसरा विवाह किया है। इस आधार पर अनावेदक के शासकीय नौकरी से सेवा की समाप्ति के पर्याप्त आधार है। जिसके लिए आयोग के द्वारा जिला शिक्षा अधिकारी गरियाबं व प्रमुख सचिव शिक्षा विभाग मंत्रालय को एक पत्र भेजा जायेगा व अनावेदक के सेवा समाप्ति की अनुशंसा की जायेगी।
एक अन्य प्रकरण में लगभग 03 वर्ष पूर्व की सुनवाई में सभी अनावेदकगणों ने आवेदिका के मृतक पति का संयुक्त संपत्ति में हक व हिस्सा देने तथा नगद राशि देने के प्रस्ताव में चर्चा किया था। आवेदिका के पति 05 भाई थे। करोडों की संपत्ति पर आवेदिका के ससुर व शेष 4 भाई ने मिलकर कब्जा कर रखा है तथा आवेदिका व उसकी बेटी को भरण-पोषण व संपत्ति में हिस्सा नहीं दे रहे है। आयोग ने कहा कि ऐसी दशा में आवेदिका अनावेदकगणों के खिलाफ मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना का एफ.आई.आर दर्ज कराने का आधार रखती है। आवेदिका के पति के नाम के मकान मे अनावेदकगणों ने कब्जा कर रखा है। आवेदिका को समझाईश दिया गया कि वह नगर निगम फौती के आधार पर अपना व अपनी बेटी का नाम वह दर्ज करवा सकती है। अनावेदकगणों से कब्जा खाली करवाने का कार्य भी आवेदिका कर सकती है। पिछली सुनवाई मे अनावेदकगणों ने आवेदिका को 30 हजार रू. महिना देने का प्रस्ताव रखा था, जिसका पालन अनावेदकगणों ने आज तक नही किया व भरण-पोषण भी नहीं दे रहे है। इससे स्पष्ट है कि अनावेदकग की नियत संपत्ति हड़पने की है। आयोग ने कहा कि आवेदिका सभी अनावेदकगणों के खिलाफ थाना- तेलीबांधा व महिला थाना में एफ.आई.आर का अधिकार सुरक्षित रखती है। अनावेदकगणों ने पिछला भरण-पोषण 50-50 हजार रू. का चेक कुल 2 लाख रू. आवेदिका को देने सहमत हुए तत्पश्चात् कार्यवाही में अगली अनुशंसा की जायेगी।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका और अनावेदक पति-पत्नि है। दोनो के मध्य सुलह हो चुकी हैं दोनो साथ रह रहे है। दोनो की दूसरी शादी है और पहली शादी से दोनो के 1-1 बच्च्े है। आवेदिका को अनावेदक से कुछ घरेलू शिकायते है। अनावेदक ने कहा कि उसकी 72 वर्षीय मां है आवेदिका उसके साथ नही रहती है। अनावेदक आवेदिका का पूरा खर्च वहन करता है और बेटी का भी खर्च वहन करता है। ऐसी दशा में आयोग द्वारा उभय पक्षों को समझाईश दिया गया कि दोनो अपने संबंधों को सुधारने का प्रयास करे और साथ में रहे। आयोग ने कहा कि यदि अनावेदक आवेदिका को दुबारा तंग करता है तो वह अनावेदक के विरूध्द थाने में एफ.आई.आर. दर्ज करा सकती है। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया ।
एक अन्य प्रकरण मे आवेदिका ने बताया कि अनावेदक शासकीय स्कूल में शिक्षक है। उभय पक्ष के बच्चे 16 एवं 18 वर्ष के है। वर्तमान में उभय पक्ष एकसाथ रहते है। अनावेदक अपनी पत्नि से मारपीट करता है। अनावेदक का कहना है कि उसकी पत्नि अनावेदक की मां से बातचीत नहीं करती और गाली-गलौच करती है। उभय पक्ष वर्तमान में बच्चों के हित के लिए एक साथ रह रहे है। अनावेदक को समझाईश दिया गया कि वह अपनी पत्नि से मारपीट ना करे यदि अनावेदक मारपीट करता है तो आवेदिका अनावेदक के खिलाफ थाना मे एफ.आई.आर दर्ज करा सकती है। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।

