KORBA: ASI के इकलौते बेटे की इलाज के दौरान मौत, 6 दिन बाद भी हमलावर फरार; डीजल चोरी गिरोह से जुड़े तार, पुलिस की भूमिका पर सवाल


कोरबा 12 जून 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। बुधवारी बायपास मार्ग पर 6-7 जून की दरम्यानी रात हुए सनसनीखेज घटनाक्रम ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। बोलेरो वाहन की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हुए चंद्रमणि उर्फ दादू ने छह दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद रायपुर स्थित रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। चंद्रमणि सहायक उप निरीक्षक (ASI) रामनारायण रात्रे के इकलौते पुत्र थे। उनके निधन की खबर मिलते ही परिजनों, रिश्तेदारों और सामाजिक संगठनों में शोक की लहर दौड़ गई, वहीं घटना के छह दिन बाद भी मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

बताया जा रहा है कि घटना की रात चंद्रमणि को बोलेरो वाहन से कुचलने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए थे। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद उनके मित्र और युवा पत्रकार अरविंद राठौर तथा साहिल निर्मलकर ने स्कूटी से आरोपियों का पीछा किया। आरोप है कि बलगी मार्ग पहुंचने पर कुछ बाइक सवारों ने उनका पीछा किया और अरविंद राठौर को पकड़कर सड़क पर गिरा दिया। इसके बाद उन्हें एक वेन्यू कार में जबरन बैठाकर बलगी मोड़ के समीप ले जाया गया, जहां 25 से 30 लोगों ने मिलकर उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। अरविंद का आरोप है कि हमलावरों ने पिस्टलनुमा हथियार उनकी कनपटी पर रखकर दो राउंड हवाई फायरिंग भी की और उनके पास मौजूद करीब एक लाख रुपये नकद, आईफोन, सोने की अंगूठी तथा सोने की चेन लूटकर फरार हो गए।

घटना के तीन दिन बाद कथित रूप से इस्तेमाल की गई वेन्यू कार लावारिस हालत में बरामद हुई, जबकि अरविंद राठौर का मोबाइल फोन भी मिला, जिसे पुलिस ने अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की। हालांकि पीड़ित पक्ष का कहना है कि घटना के अगले ही दिन एक संदिग्ध आरोपी की पहचान और हुलिया पुलिस को बता दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। चंद्रमणि की मौत के बाद मामला अब हत्या में तब्दील हो चुका है और दो संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की चर्चा जरूर है, लेकिन पुलिस की ओर से अभी तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।

सूत्रों के मुताबिक इस पूरे घटनाक्रम में जिन लोगों के नाम सामने आ रहे हैं, उनका संबंध बांकीमोंगरा, कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्र से बताया जा रहा है। साथ ही इन लोगों के तार कथित डीजल चोरी करने वाले गिरोहों से जुड़े होने की भी चर्चा है। ऐसे में यह सवाल उठ रहे हैं कि आधुनिक तकनीक, साइबर सेल और पुलिस की विशेष टीमों के बावजूद आखिर आरोपी अब तक कानून की गिरफ्त से बाहर कैसे हैं। मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों की चुप्पी और जांच की धीमी रफ्तार ने लोगों के मन में कई तरह की शंकाएं पैदा कर दी हैं।

👉 पत्रकार के अपहरण, मारपीट और लूटकांड से जुड़े तार भी जांच के दायरे में, पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

इधर पत्रकार के अपहरण, मारपीट और लूटकांड के मामले में भी कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा है कि संदिग्ध आरोपियों से कथित मेलजोल को लेकर बांकीमोंगरा थाना के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। एक पुलिस अधिकारी के इकलौते पुत्र की मौत और उससे जुड़े गंभीर अपराधों के बावजूद कार्रवाई में हो रही देरी ने आमजन के बीच कानून-व्यवस्था और जांच प्रक्रिया को लेकर असंतोष बढ़ा दिया है। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस कब तक इस पूरे मामले का खुलासा कर दोषियों को कानून के कटघरे तक पहुंचाती है। 

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