कोरबा 25 मई 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। नंदीवैध डॉ. नागेन्द्र नारायण शर्मा ने 25 मई, विश्व थायरॉइड दिवस के अवसर पर लोगों को थायरॉइड संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूक करने की अपील की गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने स्थित रहती है और शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा स्तर, हृदय गति तथा हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विशेषज्ञों ने बताया कि थायरॉइड में गड़बड़ी होने पर शरीर की कई महत्वपूर्ण क्रियाएं प्रभावित होती हैं। इसके प्रमुख विकारों में हाइपोथायरायडिज्म, हाइपरथायरायडिज्म, थायरॉइड नोड्यूल्स, थायरॉइड कैंसर और घेंघा रोग शामिल हैं।
हाइपोथायरायडिज्म में थायरॉइड हार्मोन का उत्पादन कम हो जाता है, जिससे थकान, अवसाद, वजन बढ़ना और ठंड अधिक लगना जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। वहीं हाइपरथायरायडिज्म में हार्मोन का अत्यधिक उत्पादन होता है, जिससे घबराहट, अत्यधिक पसीना, वजन घटना और बेचैनी जैसी समस्याएं होती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड विकारों के सामान्य लक्षणों में लगातार थकान, वजन में अचानक बदलाव, बाल झड़ना, शुष्क त्वचा, कब्ज, गर्दन में सूजन, मांसपेशियों में कमजोरी, मासिक धर्म में अनियमितता और गर्मी या ठंड के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता शामिल हैं।
थायरॉइड विकारों के पीछे आयोडीन की कमी या अधिकता, स्वप्रतिरक्षी रोग, पारिवारिक इतिहास, हार्मोनल असंतुलन, गर्भावस्था, धूम्रपान और बढ़ती उम्र प्रमुख कारण माने जाते हैं। महिलाओं में यह समस्या पुरुषों की तुलना में अधिक देखी जाती है।
आयुर्वेद विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित जीवनशैली, नियमित योग-प्राणायाम और पौष्टिक आहार थायरॉइड नियंत्रण में सहायक हो सकते हैं। उन्होंने प्रतिदिन सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, उज्जायी प्राणायाम, हल्का सुपाच्य भोजन और नियमित धूप सेवन की सलाह दी है।
विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की कि यदि थायरॉइड संबंधी कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत जांच कराएं और चिकित्सकीय परामर्श लें।
विश्व थायरॉइड दिवस का उद्देश्य लोगों को इस अदृश्य लेकिन गंभीर रोग के प्रति जागरूक करना और समय रहते उपचार के लिए प्रेरित करना है।

