पद्म विभूषण पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, 70 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; छत्तीसगढ़ समेत देशभर में शोक की लहर


👉 रायपुर एम्स में उपचार के दौरान हुआ निधन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

रायपुर, 5 जुलाई 2026 (नवचेतना न्यूज़ छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को विश्व पटल पर विशिष्ट पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण से सम्मानित अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त पंडवानी गायिका तीजन बाई का रविवार तड़के 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में उपचार के दौरान निधन हो गया। वे 70 वर्ष की थीं और लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उनके निधन से छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश के कला एवं संस्कृति जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

दुर्ग जिले के गनियारी गांव में 24 अप्रैल 1956 को जन्मी तीजन बाई ने बेहद साधारण परिवार से निकलकर अपनी अद्भुत प्रतिभा, दमदार प्रस्तुति और प्रभावशाली अभिनय के दम पर पंडवानी लोकगायन को वैश्विक पहचान दिलाई। उन्होंने महाभारत की कथाओं को अपनी अनूठी शैली में प्रस्तुत कर देश-विदेश के लाखों दर्शकों का दिल जीता।

बचपन से ही महाभारत की कथाओं के प्रति उनका विशेष लगाव था। सामाजिक विरोध और आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। उस समय महिलाओं के लिए पंडवानी की ‘कापालिक शैली’ में प्रस्तुति देना वर्जित माना जाता था, लेकिन तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। महज 13 वर्ष की आयु में उन्होंने चंद्रखुरी में अपनी पहली सार्वजनिक प्रस्तुति देकर अपने लंबे और गौरवशाली कलात्मक सफर की शुरुआत की।

तीजन बाई ने भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, रूस, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी सहित अनेक देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की लोककला का परचम लहराया। कला के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें वर्ष 1988 में पद्मश्री, 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण प्रदान किया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा, सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस लोक कला को अपनी भव्य प्रस्तुति से दुनियाभर में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जाना कला एवं संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति!

सीएम विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन न केवल लोककला जगत, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और देश की सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति है। उन्होंने अपनी विलक्षण प्रतिभा और लोक परंपराओं के संरक्षण के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को विश्व स्तर पर स्थापित किया। उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।

तीजन बाई केवल एक लोकगायिका नहीं थीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता की जीवंत पहचान थीं। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन लोककला के संरक्षण, संवर्धन और नई पीढ़ी तक उसकी समृद्ध परंपरा पहुंचाने के लिए समर्पित कर दिया। उनका निधन भारतीय लोककला जगत के लिए ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।




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